यूं तो
भारत में अनगिनत स्थान है जहां आप घूम सकते हैं, मौज-मस्ती कर सकते हैं व
नई-नई बातें जान सकते हैं. अक्सर लोग अपने व्यस्त जीवन से समय निकालकर कहीं
ना कहीं घूमने निकल जाते हैं व जिंदगी का आनंद उठाते हैं लेकिन भारत की
सभी दिशाओं में घूमने के बाद भी शायद आपने यह जगहें नहीं देखी होंगी जिनके
बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं.
काले जादू से घिरा असम
आज के समय
में हम खुद को आधुनिक युग का हिस्सा मानते हैं और इस बात का दावा करते हैं
कि भारत में अंधविश्वास कम हो रहा है लेकिन असम में बनी इस जगह का दृश्य
देख आप अपनी राय बदल लेंगे. असम के गुवाहाटी से ठीक 40 किलो मीटर की दूरी
पर मेयोंग नाम की जगह है जो अपनी काली माया यानि कि काले जादू के लिए
प्रसिद्ध है. लोगों ने इस जगह पर आत्माओं को भस्म होते, इंसान को जानवर
बनते हुए व विशाल जानवरों को जादुई शक्ति से वश में करते हुए देखा है.
कंकालों की झील
हिमालय की
गोद में करीब 16,500 फीट की ऊंचाई के पहाड़ों के बीचोबीच एक झील दिखाई
देती है. यह कोई साधारण झील नहीं बल्कि एक ऐसी झील है जो बरसों से अपने
अंदर 600 लोगों के मरने का राज छिपाए बैठी है. ज्यादातर यह झील बर्फ से ढकी
रहती है लेकिन बर्फ के पिघलते ही आप इसमें डरावने कंकालों की भीड़ को आसानी
से देख सकते हैं.
खुद को मौत के घाट उतारते पक्षी
इंसानों
द्वारा आत्महात्या करना आज के समय में आम बात हो गई है लेकिन असम के इस
जंगलों में आत्महत्या ने एक नया रुप धारण किया है. जतिंगा गांव में सितंबर
से अक्टूबर के महीने में रात के समय पक्षियों का एक बड़ा गुट काफी तेजी से
जंगल की ओर बढ़ता है और अचानक पेड़ों के बीच जाकर टकराता है. इतने सारे पक्षी
बिना किसी कारण के आखिर यहां क्यों अपनी जान देते हैं इसका जवाब आजतक नहीं
मिल पाया है.
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‘मेगनेटिक हिल्ल’, लद्दाख
गुरुत्वाकर्षण,
यानि कि किसी चीज को अपनी ओर खींचना, समुंद्र से 11,000 फीट ऊंचाई पर
लद्दाख के यह पहाड़ गुरुत्वाकर्षण के लिए प्रसिद्ध हैं. कहा जाता है कि यहां
प्रवेश करने वाली कोई भी चीज एक चुंबकीय क्षेत्र का शिकार हो जाती है. यदि
आपकी गाड़ी बंद भी है तो आपको यह अनुभव होगा कि आप किसी चीज की ओर खिंचे
चले जा रहे हैं. यहां आने वाला हर व्यक्ति एक अलग अनुभग लेकर वापिस जाता
है.
कमाल का पत्थर
महाराष्ट्र
के पुणे में एक छोटा सा गांव शिवपुरा स्थित है. यहां की मस्जिद में एक खास
तरह का 70 किलो ग्राम का पत्थर रखा गया है. कहा जाता है कि इस पत्थर को
सूफी संत कमार अली का वरदान है और इसे तभी उठाया जा सकता है जब कम से कम 11
ऊंगुलियों का स्पर्श इसे मिले व साथ ही कमार अली का नाम से जोर से लिया
जाए. यदि ऐसा नहीं किया गया तो कोई भी इस पत्थर को उठा नहीं सकता.
भारत में ही एक अलग देश
हिमाचल के
कुल्लू के उत्तरी-पूर्व इलाके में एक छोटा सा गांव ‘मलाना’ स्थित है जहां
के लोगों का कहना है कि वे लोग ‘सिकंदर’ के वंश से संबंध रखते हैं, इसलिए
यहां के लोग खुद को भारत का हिस्सा नहीं मानते. इस गांव में करीब 100 के
आसपास परिवार रहते हैं और वे लोग अपने गांव के बाहर किसी से संबंध नहीं
रखते.
चूहों का मंदिर
बिकानेर
से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देशनोक नाम की एक जगह है जहां चूहों को
बहुत सम्मान दिया जाता है. यहां 20,000 से भी ज्यादा चूहे हैं जिन्हें
स्थानीय लोगों द्वारा सम्मान दिया जाता है. कहा जाता है कि यहां की पूजनीय
माता करणी देवी का परिवार चूहों के रूप में यहां रहता है. इतना ही नहीं यदि
चूहों की सफेद रंग की प्रजाति को करणी माता या उनके पुत्रों का स्वरूप
माना जाता है व पूजा जाता है.
लेपाक्षी मंदिर का लटका हुआ स्तंभ
आंध्र
प्रदेश का लेपाक्षी शहर अनेकों ऐतिहासिक इमारतों का स्थान है. यहां के
लेपाक्षी मंदिर में बहुत सारे स्तंभ है, लेकिन उनमें से एक स्तंभ ऐसा भी है
जो हवा में लटका हुआ है. यह स्तंभ जमीन को नहीं छूता और बिना किसी सहारे
के खड़ा है. लोग इस बात की पुष्टि करने के लिए इस स्तंभ के नीचे से कपड़ा व
अन्य चीजें निकालते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है है कि ऐसा करना शुभ माना
गया है.
हिमाचल में ‘ममी’
यदि आपको
लगता है कि ‘ममी’ केवल मिस्र में ही पाई जाती है तो आप गलत है क्योंकि
हिमाचल के स्पिति के गुई गांव में 500 साल पुरानी एक ममी को बहुत तरीके से
संभाल का रखा गया है. इस ममी को इसी आकार में बैठे हुए खोजा गया था और तभी
से इसे इसी ढंग से रखा गया है.
मेघालय का विचित्र पुल
मेघालय के
चेरापुंजी में बने इस पुल को यदी आप एक बार देख लेंगे तो आपको कुदरत व
इंसान का एक अनोखा मेल देखने को मिलेगा. यहां के बड़े-बड़े पेड़ों की शाखाएं
इतनी मजबूत हैं कि आप उन्हें जोड़-जोड़कर एक पुल बना सकते हैं व उसका
आने-जाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं.
कर्नाटक का मंदिर जहां ‘कुत्ते’ हैं देवता
जी हां,
कर्नाटक में रामनगर जिले के चन्नपटना नामक स्थान पर कुछ लोग इंसान के सबसे
पिय मित्र कुत्ते को पूजते हैं. कुत्तों को पूजने के लिए मंदिर का भी
निर्माण किया गया है जहां उनकी मूर्ति स्थापित की गई है.
केरल में लाल बारिश
केरल का
इदुक्की जिला लाल बारिश के रहस्य को अपने भीतर छिपाए बैठा है. वर्ष 1818
में पहली बार स्थानीय लोगों ने यहां लाल रंग की बारिश का देखा था, और तब से
अब तक यहां कुछ समय बाद इस रंग की बारिश होती है. शास्त्रों की मानें तो
यह बारिश देवताओं द्वारा धरती को पाप मुक्त बनाने के लिए बरसायी जाती है.
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